गिरती है रूकती है और संभल जाती है ज़िन्दगी
नए साल के आने की कितने ख़ुशी मानते है हम
पर सोचो तो यु पल पल जाती है ज़िन्दगी
कोई बात नहीं कल आयेगा फिर हमारा
इतने में ही बेचारी बहल जाती है ज़िन्दगी
रुकने का नाम नहीं है ज़िन्दगी सुन ले
और ये सुनते ही फिर चल जाती है ज़िन्दगी
ख्वाब से कितने बुनते रह जाते है हम
और ये हाथ से निकल जाती है ज़िन्दगी
©२०१०दीप्ती
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